नागौर,राजस्थान न लड़की हूँ,न लड़का हूँ, इस सृष्टि कि एक सुन्दर रचना हूँ मै, समाज की बंदिशों मे बंधी मै अर्धनारीश्वर का स्वरूप हूँ, छक्का,हिजड़ा,किन्नर न जाने क्या-क्या मिले मुझे, मै भी…
मऊ उसने पूछा, सिगरेट पीते हो, मैंने कहा हाँ! उसने पूछा, शराब पीते हो, मैंने कहा हाँ! उसने पूछा, माँस खाते हो, मैंने कहा हाँ! उसने फिर पूछा, तब तो, इश्क भी…
वरिष्ठ साहित्यकार जाति-बिरादरी मानव निर्मित है, प्राकृतिक होती तो, हर भेद-भाव से दूर होती। जाति -बिरादरी मानव निर्मित है, प्राकृतिक तो कतई और कदापि नहीं है, प्राकृतिक होती तो, हर तरह के…
जितनी ज़्यादा दुनियादारी देखी है क़दम-क़दम धोखा-मक्कारी देखी है। मिल-जुलकर खा जाना है यह देश हमें, लोगों की ऐसी तैयारी देखी है। जब भूखों ने अपने बच्चे बेच दिए, हमने ऐसी भी…
हाँ मैं गाँधी हूँ, किन्तु सत्ता का भोगी नहीं, देश का स्वाभिमान हूँ, परतंत्रता मुझे सहन नहीं चाहे जो कहता हैं, कहने दो मैने बोलकर नही कहकर, करके दिखलाया है आज स्वतंत्र…