© माहेश्वर जोशी, देहरादून
एक अंग्रेजी हैट, छोटी-छोटी मूछें
एक खूबसूरत चेहरा
आँखों से झांकती सच्चाई
एक नौजवान का चित्र
क्या वाकई! सिर्फ एक चित्र
ये चित्र खुद में समेटे हुए है
सैंकड़ों सालों का इतिहास,
मंगल पांडे ने गुलामी के खिलाफ
जो पहली गोली चलाई
उस गोली की गूंज
छिपी है इसी चित्र में
करतार सिंह और खुदीराम बोस
फंदे से झूलते हुए दिखाई देते हैं इस चित्र में
जनरल डायर ने 1919 में
इंसानियत को जो गहरे ज़ख्म दिये
वो ज़ख्म साफ-साफ दिखाई देते हैं इस चित्र में
निहत्थे देशवासियों के सिर पर
गोरे हाथों से बरसती लाठियां
और साम्राज्यवाद के सड़े गले ताबूत में
वो आखिरी कील का गूंजता नारा
सुनाई देता है इस चित्र में
एक जांबाज़ क्रांतिकारी
जो घिरकर भी लड़ता है
और देता है सर्वोच्च बलिदान
उस आज़ाद की वीरता
दिखाई देती है इस चित्र में
तीन देशभक्त, एकदम जवान
हंसते हंसते फाँसी घर की तरफ जाते हुए
दिखाई देते हैं इस चित्र में
देश का सच्चा भगत कैसा होता है
ये बिल्कुल ही साफ-साफ
दिखाई देता है इस चित्र में

