जितनी ज़्यादा दुनियादारी देखी है
क़दम-क़दम धोखा-मक्कारी देखी है।
मिल-जुलकर खा जाना है यह देश हमें,
लोगों की ऐसी तैयारी देखी है।
जब भूखों ने अपने बच्चे बेच दिए,
हमने ऐसी भी लाचारी देखी है।
जिनके चूल्हे बहुत दिनों से ठंडे हैं,
उनकी आँखों में चिंगारी देखी है।
सच में हमने सिर्फ़ ग़रीबी के कारण,
आँगन-आँगन बेटी क्वाँरी देखी है।
पाँच जवां बेटों की बूढ़ी अम्मा में,
बर्तन माँज रही दुखियारी देखी है।
नेताओं के छुटभैये चमचों में भी,
सत्ता की भरपूर ख़ुमारी देखी है।

