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Category: साहित्य वीथी

कृतिका सिंह के कार्टून

Posted on July 4, 2026

कृतिका सिंह जी उभरती हुई कार्टूनिस्ट हैं, जीवन के विविध पक्षों पर आपके सीधे हस्तक्षेप करते कार्टून बहुत लोकप्रिय हैं, आप कृतिका जी को उनके फेसबुक पेज Kritika cartoonist https://www.facebook.com/cartoonistkritika?mibextid=ZbWKwL पर फॉलो…

प्रेम, छल और समकालीन मनुष्य की त्रासदी

Posted on July 4, 2026

परिचय दास, प्रोफेसर, नव नालंदा महाविहार नालंदा सम विश्वविद्यालय, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार “सिया-केतन-चेतन चौधरी कांड” से आशय पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड से है, जो जून,  2026 में सामने आया।…

प्रेम गली अति सांकरी

Posted on July 4, 2026

चित्रा मोहन प्रसिद्ध नाट्य निर्देशिका, लखनऊ आजकल युवा पीढ़ी की प्रेम कहानियों का, रवींद्र कालिया द्वारा संपादित संकलन पढ़ते हुए आनंद चौगुना बढ़ता चला जाता है। वैसे देखा जाए तो इश्क़े हक़ीक़ी…

फूल का खिलना यूं ही नहीं होता

Posted on April 19, 2024

प्रो. विवेक कुमार मिश्र हिंदी विभाग राजकीय कला महाविद्यालय कोटा फूल खिलते हैं और खिलते रहेंगे । फूल खिलकर ही बोलते हैं । अपने होने का , अपने अस्तित्व का गान खिलकर…

‘अज्ञेय की काव्य-यात्रा’

Posted on March 20, 2024

बृजेश गिरि प्रवक्ता, जैश किसान इन्टर कॉलेज घोसी, मऊ सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन’अज्ञेय’ प्रयोगवाद के प्रवर्तक माने जाते हैं। वैसे नयी कविता को भी साहित्य जगत में प्रतिष्ठित करने श्रेय अज्ञेय को ही…

तारसप्तक में प्रयोगवाद की अवधारणा

Posted on March 20, 2024

डॉ धनञ्जय शर्मा असिस्टेंट प्रोफेसर, सर्वोदय पी.जी.कॉलेज घोसी, मऊ अज्ञेय द्वारा संपादित सन 1943 में तार सप्तक आधुनिक हिन्दी काव्य के इतिहास में एक मील का पत्थर है। परवर्ती छायावादी कविता और…

अज्ञेय का काव्यभाषा सम्बन्धी चिन्तन

Posted on March 20, 2024

डॉ. नितिन सेठी, बरेली अज्ञेय भावुक कवि होने के साथ-साथ एक गहन चिंतक और विचारक के रूप में भी हमारे समक्ष आते हैं। अज्ञेय ने समय-समय पर सामान्य भाषा और काव्यभाषा; इन…

भाषा वैशिष्ट्य और अज्ञेय

Posted on March 20, 2024

प्रियंवदा पाण्डेय देवरिया उत्तर प्रदेश युग प्रवर्तक अज्ञेय को भला कौन नहीं जानता है। अपनी लेखनी से उन्होंने नवीन प्रतिमान तो स्थापित किए ही साथ ही एक नई शैली और नई विचारधारा…

अज्ञेय की जीवंतता और सजगता का दस्तावेज़ : भवंती, अन्तर और शाश्वती

Posted on March 20, 2024

डॉ. दिलीप शर्मा, प्राक्तन उप प्राचार्य, नगाँव कालेज नगाँव : असम अज्ञेय मूलतः एक लेखक हैं, दार्शनिक नहीं, समस्याएं चाहें एक सी हों कवि के चिंतन के औजार, सोचने का ढंग, विचारों…

अज्ञेय के गद्य को पढ़ते हुए…….

Posted on March 12, 2024

विमलेश कुमार मिश्र आचार्य,हिन्दी विभाग दी.द.उ. गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर अज्ञेय तो अनेक हैं, मैं किस अज्ञेय की बात करूँ। क्या हिन्दी की कोई ऐसी परम्परा है, जिससे अज्ञेय जुड़ते हैं। हिन्दी में…

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