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Category: सोंधी मिटटी

कविता- एक दिन पहाड़ उकता उठेंगे

Posted on February 19, 2024

डॉ एस पी सती भू वैज्ञानिक पर्यावरणविद, उत्तराखंड एक दिन आएगा जब तुम्हारे कर्मों से उकता कर अचानक कुदरत समेटने लगेगी अपने पहाड़ सबसे पहले नदियों को सरकायेगी खींच कर और पहाड़…

कविता – राम

Posted on January 20, 2024

अविनाश पाण्डेय, वाराणसी राम तुम प्रसंग से परे नहीं हुए कभी अट्टहास रावणों के ध्वनित हो रहे अभी। देव, दानव, मनुज के अब रूप दिखते एक हैं भ्रमित, उद्वेलित व कुंठित नीतियों…

कविता – सब देखते रह जाएंगे

Posted on January 20, 2024

डॉ नमिता राकेश उपनिदेशक, भारत सरकार, वरिष्ठ साहित्यकार हे राम ! तुम तो पुरुषोत्तम हो जो तुम पर सवाल उठाएं वो उत्तम कैसे हो सकते हैं तुम्हारा नाम लेकर जब पत्थर तैर…

कविता – राम

Posted on January 20, 2024

© दयाशंकर तिवारी, वरिष्ठ साहित्यकार, मऊ लछिमन सीता संग गये बन दशरथ राज दुलारे राम। केवट उतराई भरपाई भव से पार उतारे राम। जूठे शबरी बेर भी खाये नारि अहिल्या तारे राम।…

कविता- विलुप्त होता जायेगा प्रेम

Posted on December 16, 2023

© मनीष उपाध्याय, मऊ, उत्तरप्रदेश गिद्ध,गौराया,तितली और चीता की तरह विलुप्त होता जायेगा प्रेम भी। पर्व, उत्सव, उमंग, उल्लास अब बस किताबों में मिलेंगे ओझल हो जायेंगे रिश्ते-नाते, सगे-संबंधी सब डार्विन कहता…

कवि डॉ धनञ्जय शर्मा जी की दो कवितायेँ

Posted on December 16, 2023

असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग सर्वोदय पीजी कॉलेज, घोसी, मऊ दिया और बाती आओ हम दिए को दिए से जलाएं, जगत से सभी यूं अंधेरा मिटाएं। है कल्लू की मड़ई मदन की कोठरी,…

कविता – काव्य-सरिता अवरुद्ध क्यूँ हैं

Posted on December 14, 2023

© अश्वनी अकल्पित, नयी दिल्ली हाथ ने कलम थामी है, नोक पन्नों पर रखी है ना जाने कितनी बातें, विचार, कहानियां, इच्छाएं शब्द-सागर में डूबने को आतुर हैं – पर कागज से…

ग़ज़ल

Posted on December 14, 2023

© हरिलाल राजभर ‘कृषक’, घोसी, मऊ समझो महज़ न ख़्वाब हमारा ये गाँव है खिलता हुआ गुलाब हमारा ये गाँव है बिजली की रोशनी पे करे शह्र गर गुमां ख़ुद चाँद आफ़ताब…

लघुकथा – जय श्री

Posted on November 15, 2023

जय श्री नवोदित लेखिका हैं, बिम्बों और प्रतीकों के माध्यम से समकालीन विषयों पर रचे पात्र-विन्यास और कथानक इनकी महत्वपूर्ण विशेषता है बिकासुल (प्रातः कालीन समय, कंपनी गार्डन का दृश्य, दो मित्र…

लघुकथा : नेता जी  

Posted on November 14, 2023

©  डॉ सौरभ श्रीवास्तव नेता जी जनसमूह को संबोधित कर रहे थे, “मैं आप लोगों के साथ हमेशा खड़ा हूँ, आप लोग बस मेरे साथ खड़े रहिये, मैं इस राज्य के मुख्यमंत्री…

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