डॉ एस पी सती भू वैज्ञानिक पर्यावरणविद, उत्तराखंड एक दिन आएगा जब तुम्हारे कर्मों से उकता कर अचानक कुदरत समेटने लगेगी अपने पहाड़ सबसे पहले नदियों को सरकायेगी खींच कर और पहाड़…
अविनाश पाण्डेय, वाराणसी राम तुम प्रसंग से परे नहीं हुए कभी अट्टहास रावणों के ध्वनित हो रहे अभी। देव, दानव, मनुज के अब रूप दिखते एक हैं भ्रमित, उद्वेलित व कुंठित नीतियों…
डॉ नमिता राकेश उपनिदेशक, भारत सरकार, वरिष्ठ साहित्यकार हे राम ! तुम तो पुरुषोत्तम हो जो तुम पर सवाल उठाएं वो उत्तम कैसे हो सकते हैं तुम्हारा नाम लेकर जब पत्थर तैर…
असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग सर्वोदय पीजी कॉलेज, घोसी, मऊ दिया और बाती आओ हम दिए को दिए से जलाएं, जगत से सभी यूं अंधेरा मिटाएं। है कल्लू की मड़ई मदन की कोठरी,…
जय श्री नवोदित लेखिका हैं, बिम्बों और प्रतीकों के माध्यम से समकालीन विषयों पर रचे पात्र-विन्यास और कथानक इनकी महत्वपूर्ण विशेषता है बिकासुल (प्रातः कालीन समय, कंपनी गार्डन का दृश्य, दो मित्र…