मन के सांकल खटखटाती श्रीमती अनूप कटारिया जी की कविता – ” क्यूँ रंगती हूँ” क्यूँ रंगती हूँ मैँ इन डायरी के पन्नों को कौन देखेगा इन इन्द्रधनुषी रंगों को सब रंगहीन…
(प्रसिद्ध कवियित्री श्रीमती नमिता राकेश जी, दिल्ली की कविता- “युद्ध” ) युद्ध लड़ना और जीतना दो देशों या कुछ देशों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न हो सकता है, लेकिन युद्ध करना इतना…
एक कविता जन्म लेती है खेत मे फसल लहलहाने पर। एक कविता जन्म लेती है, बाग में फूल मुरझाने पर। कविताओं का जन्म निरन्तर होता रहता है हर क्षण,हर युग में। हर…