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  • “वीथिका ई पत्रिका : पर्यावरण विशेषांक”जून, 2024”
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Category: सोंधी मिटटी

रमेश गौतम के नवगीतों में नदी

Posted on June 17, 2024

डॉ.नितिन सेठी सी-231, शाहदाना कालोनी, बरेली (243005) रमेश गौतम प्रख्यात नवगीतकार हैं। उनके नवगीतों में प्रकृति के अनेक सुंदर चित्रण मिलते हैं। पर्वत, सागर, पंछी, हवा, नदी; सभी अपने-अपने मुखरित सौन्दर्य की…

कविता – आओ पेड़ लगाए हम

Posted on June 17, 2024

©आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका) ग्वालियर मध्य प्रदेश आओ पेड़ लगाए हम धरा पुकार रही है तुमको नित्य उजड़ रहे है उपवन, तापमान में हो रही है वृद्धि निरंतर कटते वृक्षों के…

सुनो धरा की करुण पुकार

Posted on June 17, 2024

रंजना बिनानी काव्या  गोलाघाट असम सुनो धरा की करुण पुकार हरी-भरी ये ,शस्य श्यामला धरा हमारी, आओ करें.. हम इसका श्रृंगार..। मत करो ..प्रदूषित इसको, सुनो धरा की, करुण पुकार। अन्न ,फल,…

कविता – पर्यावरण संरक्षण

Posted on June 17, 2024

मीता लुनिवाल “मीत” जयपुर, राजस्थान आओ हम ये संकल्प करें पर्यावरण को नष्ट होने से बचाएगे जगह जगह हम पेड़ लगाए नये नये पेडो से धरती को सजाएगे देकर नवजीवन इस प्रकृति…

कविता – रेणु सिंह राधे

Posted on June 17, 2024

बहुत दिन हो गए थे उगता सूरज देखे आज देखा तो महसूस हुआ एक जरा सी नींद के लिए मेंने जानें क्या क्या ही खोया ….. लाल मद्धम रोशनी में नहाया साफ…

पेड़ मत काटो

Posted on June 17, 2024

नमिता राकेश. देखो भाई ! पेड़ मत काटो काटना है तो उन दरिंदों के सर काटो जो रात दिन  मासूम लोगों का  खून बहाते हैं  पेड़ काटने से तुम्हें क्या मिलेगा किसका…

गीत- नहीं तुम वृक्ष काटना

Posted on June 17, 2024

कवियित्री- प्रीति चौधरी”मनोरमा” मनुज नहीं तुम वृक्ष काटना,  ये ही देते हैं छाया।  हरी भरी है इनसे धरती, ये जीवों का सरमाया ।। नीड़ बनाते इन पर पक्षी,  ये ही तो उनका…

कविता – बसंत ऋतु का स्वागत

Posted on February 19, 2024

अश्वनी अकल्पित नयी दिल्ली एक: बसंत ऋतु के आगमन पर लिखे है शब्द चार दो तो ठंड से जम गए दो धूप रहे ताप दो धूप रहे ताप मन में ही मनभर…

कविता – फाँसी के फंदे पर झूलता अन्याय ?

Posted on February 19, 2024

युवा कवि अनिल कुमार केसरी देई, जिला बूंदी राजस्थान न्याय के चरम पर झूलते फाँसी के फंदे को, पता है सच और झूठ के बीच का फासला ? उसने देखा है गुनाह…

कविता – नव वर्ष

Posted on February 19, 2024

मनोज कुमार सिंह लेखक/साहित्यकार/ उप-सम्पादक, कर्मश्री मासिक पत्रिका आया नववर्ष लेकर नई सुगंध स्वर्णिम नूतन बिहान आंखों में उम्मीदों की चमक, हर सीने में सुमधुर गान, आया नववर्ष लेकर नई सुगंध स्वर्णिम…

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