Skip to content
वीथिका
Menu
  • Home
  • आपकी गलियां
    • साहित्य वीथी
    • गैलिलियो की दुनिया
    • इतिहास का झरोखा
    • नटराज मंच
    • अंगनईया
    • घुमक्कड़
    • विधि विधान
    • हास्य वीथिका
    • नई तकनीकी
    • मानविकी
    • सोंधी मिटटी
    • कथा क्रमशः
    • रसोईघर
  • अपनी बात
  • e-पत्रिका डाउनलोड
  • संपादकीय समिति
  • संपर्क
  • “वीथिका ई पत्रिका : पर्यावरण विशेषांक”जून, 2024”
Menu

वेब 3.0 – दी ग्लोबल ब्रेन

Posted on July 1, 2023

राज बरेठिया, सॉफ्टवेयर इंजिनियर, ट्रेडर यह जीवन के हर पहलू में डिजिटल क्रांति का युग है। राजनीति से लेकर धर्म तक, सामाजिक गतिशीलता से लेकर आर्थिक स्वतंत्रता तक, व्यक्तिगत गोपनीयता से लेकर…

हिन्दी या इन्दी

Posted on July 1, 2023

प्रो. मोहम्मद ज़ियाउल्लाह, विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग डीसीएसके पीजी कॉलेज , मऊ हिन्दी एक महान भाषा है। सैकड़ों साल पुरानी और भारत की निशानी है। गर्व की बात यह है कि बिना किसी…

यमुनोत्री

Posted on July 1, 2023

ई वैभव द्विवेदी हम इंसान बहुत जिज्ञासु हैं, आज के समय से ही नहीं बल्कि मनुष्य ने अपने शुरुआत से घुमक्कड़ी को अपनी जिज्ञासा शांत करने का एक प्रमुख साधन बनाया है…

कविता – नानी का घर…

Posted on July 1, 2023

आनंद कुमार सच में कितना प्यारा था मेरे नानी का घर… चापा कल से, पानी का भरना नदी में जाकर, छप्प-छप्प नहाना बगीचे में जाकर, शरीफा को खाना, आम के पेड़ पर,…

गांव बोलता नहीं, चुप रहता है अब

Posted on July 1, 2023

डॉ.सौरभ श्रीवास्तव बरगद का वो पेड़ जिसकी जड़ें फैली थी चारों तरफ वर्षों से वो भी चुप है, गायों का झुंड भी अब शांत है गांव के बगल से जो नदी गुजरती…

कहानी – फागू का फगुआ

Posted on July 1, 2023

डॉ धनञ्जय शर्मा, लेखक व असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग सर्वोदय पोस्ट ग्रेजुएट महाविद्यालय, घोसी, मऊ बलिया जिले के बिल्थरारोड स्टेशन से दो मील पश्चिम बसा गाँव ससना अपनी प्राचीनता को लेकर उतना…

बुंदेलखंड की लोकनाट्य कलाएं

Posted on July 1, 2023

अभिदीप सुहाने, युवा रंगकर्मी छतरपुर ( म.प्र.) लोक एक बहू अर्थी शब्द है जो कि मूलतः संस्कृत का है। विश्व का कोई भी विशेष भाग, प्रजा/लोग आदि इसी शब्द के पर्याय या…

लोक में बसा गाँव या गाँव में छिपा लोक

Posted on July 1, 2023

डॉ अपर्णा पाण्डेय, प्रवक्ता, हिंदी स्व. कुबेर सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मिर्ज़ापुर गाँव को यदि लोक संस्कृति का मूर्त स्वरुप कहें तो अत्युक्ति न होगी । गाँव का आदमी निरक्षर भले हो लेकिन…

लोकजीवन और साहित्य

Posted on July 1, 2023

दयाशंकर तिवारी, मऊ, उत्तरप्रदेश   (लेखक वरिष्ठ साहित्यकार हैं, लोक साहित्य में आपके 4 काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं) भारतीय संस्कृति में लोक जीवन और लोक साहित्य का चोली-दामन का साथ…

हम, हमारी पहचान व हमारी समझ

Posted on July 1, 2023

डॉ शिवमूरत यादव, Post Doctoral Research Fellow University of Oklahoma, Health Sciences Center, USA नवजात शिशु से शुरूआत करें तो हम सभी एक ही हैं, जैसे-जैसे व्यक्ति बड़ा होता जाता है हर…

Posts pagination

Previous 1 … 15 16 17 … 19 Next

Recent Posts

  • कविता – करते रुदन विलाप हैं पाठन बिन सब छंद
  • वीथिका ई पत्रिका का जनवरी, 2026 अंक ” शिव-शक्ति”
  • वीथिका ई पत्रिका का जून-जुलाई, 2025 संयुक्तांक “बिहू : ओ मुर अपुनर देश”
  • वीथिका ई पत्रिका का मार्च-अप्रैल, 2025 संयुक्तांक प्रेम विशेषांक ” मन लेहु पै देहु छटांक नहीं
  • लोक की चिति ही राष्ट्र की आत्मा है : प्रो. शर्वेश पाण्डेय
©2026 वीथिका | Design: Newspaperly WordPress Theme