Skip to content
वीथिका
Menu
  • Home
  • आपकी गलियां
    • साहित्य वीथी
    • गैलिलियो की दुनिया
    • इतिहास का झरोखा
    • नटराज मंच
    • अंगनईया
    • घुमक्कड़
    • विधि विधान
    • हास्य वीथिका
    • नई तकनीकी
    • मानविकी
    • सोंधी मिटटी
    • कथा क्रमशः
    • रसोईघर
  • अपनी बात
  • e-पत्रिका डाउनलोड
  • संपादकीय समिति
  • संपर्क
  • “वीथिका ई पत्रिका : पर्यावरण विशेषांक”जून, 2024”
Menu

कविता – नानी का घर…

Posted on July 1, 2023

आनंद कुमार

सच में कितना प्यारा था

मेरे नानी का घर…

चापा कल से, पानी का भरना

नदी में जाकर, छप्प-छप्प नहाना

बगीचे में जाकर, शरीफा को खाना,

आम के पेड़ पर, लटक-लटक जाना

लुका-छिपी के खेल में, खटिया के नीचे

बड़ा मज़ा आता था,

मेरी शिकायत पे, मामा जब सबको पीटे

सच में कितना प्यारा था

मेरे नानी का घर…

मां के सम्बोधन से, क बेटा कह कर

मेरे को, नाना का पुकारना

पास बुलाकर, दुलारना, पुचकारना

मामा का सुबह सबेरे, जलेबी ले आना

कभी-कभी ले जाकर, पूड़ी -सब्जी खिलाना

मां जैसी मामी का, प्यार उड़ेलना

मौसी का बाबू कहकर, मुझको बुलाना

भाई-बहनों की फौज थी कितनी

सच में यारों नानी के घर, मौज थी कितनी

खप्पर नहीं है, छप्पर नहीं

सोंधी-सोंधी मिट्टी की अब खुशबू नहीं

नाना नहीं हैं, और नानी नहीं हैं

बचपन की चिल्लाहट और यारी नहीं है

नानी का पुराना वह घर भी नहीं है

बने हैं इमारत पर हिस्से कई हैं

बचे शेष बूढ़े, जो प्यार खूब हैं करते

पर जाऊं मैं कैसे, मेरे पास समय ही नहीं है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • कविता – करते रुदन विलाप हैं पाठन बिन सब छंद
  • वीथिका ई पत्रिका का जनवरी, 2026 अंक ” शिव-शक्ति”
  • वीथिका ई पत्रिका का जून-जुलाई, 2025 संयुक्तांक “बिहू : ओ मुर अपुनर देश”
  • वीथिका ई पत्रिका का मार्च-अप्रैल, 2025 संयुक्तांक प्रेम विशेषांक ” मन लेहु पै देहु छटांक नहीं
  • लोक की चिति ही राष्ट्र की आत्मा है : प्रो. शर्वेश पाण्डेय
©2026 वीथिका | Design: Newspaperly WordPress Theme