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कविता – मैं इन्तजार कर रहा हूँ’ © बृजेश गिरि

Posted on November 11, 2023

मऊ

उसने पूछा,

सिगरेट पीते हो,

मैंने कहा हाँ!

उसने पूछा,

शराब पीते हो,

मैंने कहा हाँ!

उसने पूछा,

माँस खाते हो,

मैंने कहा हाँ!

उसने फिर पूछा,

तब तो,          

इश्क भी करते होगे!

मैंने कहा हाँ।

फिर उसने कहा

तुम अच्छे नहीं हो।

उसने फिर पूछा,

धर्म को मानते हो,

मैंने कहा हाँ!

उसने पूछा,

ईश्वर में आस्था है,

मैंने कहा हाँ!

अब उसने कहा,

तुम अच्छे हो।

मैंने भी उससे पूछ लिया,

आशाराम,नित्यानंद, परमानंद, राम रहीम, सोनी बर्गीस,जैस के जार्ज आदि।

सबके सब धर्म को मानते हैं,

ईश्वर में उनकी आस्था है,

उसने कोई जवाब नहीं दिया,

और अब तक उसके जवाब का,

मैं इन्तजार कर रहा हूँ!

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