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कविता – गाँधी जयंती © रजनीकांत तिवारी

Posted on October 10, 2023

हाँ मैं गाँधी हूँ, किन्तु सत्ता का भोगी नहीं,

देश का स्वाभिमान हूँ, परतंत्रता मुझे सहन नहीं

चाहे जो कहता हैं, कहने दो

मैने बोलकर नही कहकर, करके दिखलाया है

आज स्वतंत्र हो जिस धरा पर तुम वो भूमि तुम्हें दिलवाया है

बहुतों ने आहूति देकर इसे स्वतंत्रता कराया है

आसान है, मुझे दोषी ठहराना

आनंद के लिए गलत साबित कर जाना

अंग्रेजों को बाहर फेंका था तुम्हारे लिए हमने

तुमअपने घर का ही कूड़ा फेंक कर दिखलाओ

हमने स्वतंत्र भारत को किया था

आप स्वच्छ भारत तो कर के जाओ

मत कहो भले इसे गाँधी जयंती

मगर भारत को स्वच्छ भारत बनाओ ।

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