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हम याद बहुत आएंगे

Posted on July 1, 2023

प्रसिद्ध रंगमंच निर्देशिका चित्रा मोहन जी का भारतेंदु बाबू को समर्पित मौलिक नाटक “हम याद बहुत आएंगे“ आदरणीया चित्रा मोहन जी प्रख्यात व वरिष्ठ रंगमंच निर्देशिका व प्रवक्ता हैं । आप भारतेंदु…

ग़ज़ल : प्रख्यात ग़ज़लकार श्री विनय मिश्र जी

Posted on July 1, 2023

वरिष्ठ साहित्यकार, एसो. प्रोफेसर राजकीय कला पीजी कॉलेज, अलवर शहर हो या देहात में औरत जीवन की हर बात में औरत टूटी छत की चिंताएँ ले छत पर है बरसात में औरत…

हांड़ी की कलौंजी

Posted on July 1, 2023

अर्चिता उपाध्याय कलौंजी का नाम आते ही भोजन के खुबसूरती का एहसास होने लगता है .वैसे तो तरह-तरह से लोग बनाते ही हैं लेकिन गांव की सोंधी मिट्टी‌ से बनी कलौंजी के…

वेब 3.0 – दी ग्लोबल ब्रेन

Posted on July 1, 2023

राज बरेठिया, सॉफ्टवेयर इंजिनियर, ट्रेडर यह जीवन के हर पहलू में डिजिटल क्रांति का युग है। राजनीति से लेकर धर्म तक, सामाजिक गतिशीलता से लेकर आर्थिक स्वतंत्रता तक, व्यक्तिगत गोपनीयता से लेकर…

हिन्दी या इन्दी

Posted on July 1, 2023

प्रो. मोहम्मद ज़ियाउल्लाह, विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग डीसीएसके पीजी कॉलेज , मऊ हिन्दी एक महान भाषा है। सैकड़ों साल पुरानी और भारत की निशानी है। गर्व की बात यह है कि बिना किसी…

यमुनोत्री

Posted on July 1, 2023

ई वैभव द्विवेदी हम इंसान बहुत जिज्ञासु हैं, आज के समय से ही नहीं बल्कि मनुष्य ने अपने शुरुआत से घुमक्कड़ी को अपनी जिज्ञासा शांत करने का एक प्रमुख साधन बनाया है…

कविता – नानी का घर…

Posted on July 1, 2023

आनंद कुमार सच में कितना प्यारा था मेरे नानी का घर… चापा कल से, पानी का भरना नदी में जाकर, छप्प-छप्प नहाना बगीचे में जाकर, शरीफा को खाना, आम के पेड़ पर,…

गांव बोलता नहीं, चुप रहता है अब

Posted on July 1, 2023

डॉ.सौरभ श्रीवास्तव बरगद का वो पेड़ जिसकी जड़ें फैली थी चारों तरफ वर्षों से वो भी चुप है, गायों का झुंड भी अब शांत है गांव के बगल से जो नदी गुजरती…

कहानी – फागू का फगुआ

Posted on July 1, 2023

डॉ धनञ्जय शर्मा, लेखक व असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग सर्वोदय पोस्ट ग्रेजुएट महाविद्यालय, घोसी, मऊ बलिया जिले के बिल्थरारोड स्टेशन से दो मील पश्चिम बसा गाँव ससना अपनी प्राचीनता को लेकर उतना…

बुंदेलखंड की लोकनाट्य कलाएं

Posted on July 1, 2023

अभिदीप सुहाने, युवा रंगकर्मी छतरपुर ( म.प्र.) लोक एक बहू अर्थी शब्द है जो कि मूलतः संस्कृत का है। विश्व का कोई भी विशेष भाग, प्रजा/लोग आदि इसी शब्द के पर्याय या…

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