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कविता – मेरी प्रिये

Posted on July 4, 2026

कामरान खान

आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश  

तुम मुझसे प्रेम करो

जैसे मैं तुमसे करता हूँ

बिल्कुल

उसी तरह

जैसे मैं सूने आँगन में

अनार की छांव में बैठकर

हथेली को कपोल से सटाकर

तुम्हारी लहराती केशों में

गुलाब की गंध की तरह

तुम्हारे होने को

महसूस करता हूँ

तुम मुझसे प्रेम करो,,,,,,,

जैसे मैं तुमसे करता,,,,

तुम्हारी हिचकियों में

तुम्हारी सिसकियों में

एक घूट पानी की तरह

आकाश में छिपे तारों

की रोशनी की तरह

जैसे चंद्रमा चकोर से करता है

बिल्कुल उसी तरह

तुम मुझसे प्रेम करो जैसे मैं तुमसे करता हूँ ।

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