Skip to content
वीथिका
Menu
  • Home
  • आपकी गलियां
    • साहित्य वीथी
    • गैलिलियो की दुनिया
    • इतिहास का झरोखा
    • नटराज मंच
    • अंगनईया
    • घुमक्कड़
    • विधि विधान
    • हास्य वीथिका
    • नई तकनीकी
    • मानविकी
    • सोंधी मिटटी
    • कथा क्रमशः
    • रसोईघर
  • अपनी बात
  • e-पत्रिका डाउनलोड
  • संपादकीय समिति
  • संपर्क
  • “वीथिका ई पत्रिका : पर्यावरण विशेषांक”जून, 2024”
Menu

किताबें और जादू : पियूष गोयल

Posted on June 17, 2024

दुनिया में एक से एक कलाकार मौजूद है जिनकी प्रतिभा देखकर लोग चमत्कार समझने लगते है। ऐसे ही एक कलाकार ने पांच तरह की पुस्तकों को लिखकर चौका दिया है। लेखक पीयूष…

हमारी पृथ्वी

Posted on June 17, 2024

सोनल मंजू श्री ओमर राजकोट, गुजरात पृथ्वी इकलौता ऐसा ग्रह है, जहाँ जीवन सम्भव है। जहाँ का वातावरण अनुकूल और प्रकृति सुगम और मनोरम है। मेरा मानना है कि प्रकृति से बड़ा…

जलसंवर्धन की दिशा में कदम: गढ़वाल हिमालय की स्थिति

Posted on June 17, 2024

नरेश सिंह वानिकी (वृक्ष सुधार विभाग) वानिकी महाविद्यालय, रानीचौरी, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड जलसंवर्धन की दिशा में कदम: गढ़वाल हिमालय की स्थिति गढ़वाल हिमालय भारत के उत्तरी भाग में स्थित एक महत्वपूर्ण और…

उत्तराखंड में वनाग्नि और जलवायु परिवर्तन: एक गंभीर चुनौती

Posted on June 17, 2024

प्रियंका ठाकुर                                                                                          वानिकी  स्नातकोत्तर (वन जीव विज्ञान एवं वृक्ष सुधार विभाग) वानिकी महाविद्यालय, रानीचौरी, टिहरी गढ़वाल , उत्तराखंड उत्तराखंड, जिसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है, अपने सुंदर…

रमेश गौतम के नवगीतों में नदी

Posted on June 17, 2024

डॉ.नितिन सेठी सी-231, शाहदाना कालोनी, बरेली (243005) रमेश गौतम प्रख्यात नवगीतकार हैं। उनके नवगीतों में प्रकृति के अनेक सुंदर चित्रण मिलते हैं। पर्वत, सागर, पंछी, हवा, नदी; सभी अपने-अपने मुखरित सौन्दर्य की…

ताज़े पानी की झील–करेरी झील

Posted on June 17, 2024

डॉक्टर जय महलवाल(अनजान) राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा में उत्तर पश्चिम धौलाधार के दक्षिण में 3110मीटर ऊंचाई पर स्थित  करेरी झील एक ताज़े पानी की झील है।…

कविता – आओ पेड़ लगाए हम

Posted on June 17, 2024

©आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका) ग्वालियर मध्य प्रदेश आओ पेड़ लगाए हम धरा पुकार रही है तुमको नित्य उजड़ रहे है उपवन, तापमान में हो रही है वृद्धि निरंतर कटते वृक्षों के…

सुनो धरा की करुण पुकार

Posted on June 17, 2024

रंजना बिनानी काव्या  गोलाघाट असम सुनो धरा की करुण पुकार हरी-भरी ये ,शस्य श्यामला धरा हमारी, आओ करें.. हम इसका श्रृंगार..। मत करो ..प्रदूषित इसको, सुनो धरा की, करुण पुकार। अन्न ,फल,…

कविता – पर्यावरण संरक्षण

Posted on June 17, 2024

मीता लुनिवाल “मीत” जयपुर, राजस्थान आओ हम ये संकल्प करें पर्यावरण को नष्ट होने से बचाएगे जगह जगह हम पेड़ लगाए नये नये पेडो से धरती को सजाएगे देकर नवजीवन इस प्रकृति…

कविता – रेणु सिंह राधे

Posted on June 17, 2024

बहुत दिन हो गए थे उगता सूरज देखे आज देखा तो महसूस हुआ एक जरा सी नींद के लिए मेंने जानें क्या क्या ही खोया ….. लाल मद्धम रोशनी में नहाया साफ…

Posts pagination

Previous 1 2 3 4 … 19 Next

Recent Posts

  • कविता – करते रुदन विलाप हैं पाठन बिन सब छंद
  • वीथिका ई पत्रिका का जनवरी, 2026 अंक ” शिव-शक्ति”
  • वीथिका ई पत्रिका का जून-जुलाई, 2025 संयुक्तांक “बिहू : ओ मुर अपुनर देश”
  • वीथिका ई पत्रिका का मार्च-अप्रैल, 2025 संयुक्तांक प्रेम विशेषांक ” मन लेहु पै देहु छटांक नहीं
  • लोक की चिति ही राष्ट्र की आत्मा है : प्रो. शर्वेश पाण्डेय
©2026 वीथिका | Design: Newspaperly WordPress Theme