लेखिका- डॉ. रचना सिंह “रश्मि”, आगरा नीरज और रागिनी ने आपस में मिलकर अपने पिता की कोठी और फार्म हाऊस बेचने.की योचना बनायी । नीरज ने कहा, “रागिनी एक प्लान है लेकिन…
एडवोकेट सत्यप्रकाश सिंह विगत कुछ दिन पूर्व माननीय उच्चतम न्यायालय के सम्मानित मुख्य न्यायाधीश ने एक न्याय व्यवस्था से जुड़े समारोह में न्याय की भाषा पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि,…
अभिनेता, रंगकर्मी, निर्देशक, लेखक श्री अविनाश पाण्डेय जी की ग़ज़ल बेकरार दिल है ये, ढूँढता करार है है किधर सुकूं पड़ा, उलझने हज़ार हैं… बेसबब से अश्क क्यूँ, कर रहे हैं चश्मेनम…
मन के सांकल खटखटाती श्रीमती अनूप कटारिया जी की कविता – ” क्यूँ रंगती हूँ” क्यूँ रंगती हूँ मैँ इन डायरी के पन्नों को कौन देखेगा इन इन्द्रधनुषी रंगों को सब रंगहीन…
(प्रसिद्ध कवियित्री श्रीमती नमिता राकेश जी, दिल्ली की कविता- “युद्ध” ) युद्ध लड़ना और जीतना दो देशों या कुछ देशों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न हो सकता है, लेकिन युद्ध करना इतना…
प्रसिद्ध रंगमंच निर्देशिका चित्रा मोहन जी का भारतेंदु बाबू को समर्पित मौलिक नाटक “हम याद बहुत आएंगे“ आदरणीया चित्रा मोहन जी प्रख्यात व वरिष्ठ रंगमंच निर्देशिका व प्रवक्ता हैं । आप भारतेंदु…
मनोज कुमार सिंह ” प्रवक्ता “ लेखक/ साहित्यकार/ उप सम्पादक कर्मश्री मासिक पत्रिका अत्यंत प्राचीन काल से अंग्रेजों के आगमन तक अपनी सादगी, साफगोई, भोलापन और अपनी भलमनसाहत के लिए साहित्यिक कृतियों…
लेखिका – श्रीमती शैली जी, लखनऊ मेरे साथ एक लड़की पढ़ती थी, उसका नाम था ओमपती। गाँव से आती थी, बिल्कुल देसी। सूरत भी थी गाँव की सोंधी मिट्टी के तेल सी। वर्ष…
व्यंग्यकार- चुनमुन जी हमारे ननिहाल में एक थे हरखू भैया, बेचारे भोले -भाले हरखू और कड़कदार मिर्ची की तरह तीखी उनकी घरवाली । हरखू भाई के समधी आने वाले थे तो खुब…