Skip to content
वीथिका
Menu
  • Home
  • आपकी गलियां
    • साहित्य वीथी
    • गैलिलियो की दुनिया
    • इतिहास का झरोखा
    • नटराज मंच
    • अंगनईया
    • घुमक्कड़
    • विधि विधान
    • हास्य वीथिका
    • नई तकनीकी
    • मानविकी
    • सोंधी मिटटी
    • कथा क्रमशः
    • रसोईघर
  • अपनी बात
  • e-पत्रिका डाउनलोड
  • संपादकीय समिति
  • संपर्क
  • “वीथिका ई पत्रिका : पर्यावरण विशेषांक”जून, 2024”
Menu

फिर फिर जन्मी पार्वती शिव को वरने

Posted on September 5, 2023

रश्मि धारिणी धरित्री सुधिजनों को सस्नेह नमस्कार! मैं धारित्रि धारिणी आज चौमासा और प्रकृति के श्रृंगार को देख कर आह्लादित हूँ। चौमासा, मानसून, वर्षा ऋतु, कितने अनगिनत विदुषी विद्वानों ने करोड़ों पक्तियाँ…

वृन्दावन संस्मरण

Posted on September 5, 2023

डॉ नमिता राकेश, राजपत्रित अधिकारी व साहित्यकार अचानक वृन्दावन जाने का प्रोग्राम बन गया और हम चार लोग मन में भगवान के दर्शन की आस लिए चल दिए वृन्दावन की ओर। इनमें…

हम याद बहुत आएंगे

Posted on September 5, 2023

प्रसिद्ध रंगमंच निर्देशिका चित्रा मोहन जी का भारतेंदु बाबू को समर्पित मौलिक नाटक “हम याद बहुत आएंगे“ आदरणीया चित्रा मोहन जी प्रख्यात व वरिष्ठ रंगमंच निर्देशिका व प्रवक्ता हैं । आप भारतेंदु…

हिंदी के बहाने से : हिंदी दिवस विशेष

Posted on September 5, 2023

डॉ नमिता राकेश, वरिष्ठ साहित्यकार सितम्बर का महीना शुरू हो चुका था और हिंदी पखवाड़े का भी ! अक्सर हिंदी पखवाड़े और श्राद्ध की तिथियाँ आस पास ही पड़ती है और हम…

भारत और चंद्रयान 3

Posted on September 5, 2023

डॉ सुधांशु लाल यूं तो चाँद हमेशा से मनुष्य के लिए कौतूहल का विषय रहा है, हमारी कहानियों, किस्सों और कविताओं मे चाँद को मामा से ले कर प्रेमी, प्रेयसी तक कह…

बाबू भारतेंदु हरिश्चन्द्र : 173 वीं जयंती पर नमन

Posted on September 5, 2023

सुमित उपाध्याय लेखन की रचना प्रक्रिया सदैव अपनी ओर आलोचकों, समीक्षकों का ही नहीं अपितु पाठकों का भी ध्यान आकर्षित करती रही है । किसी व्यक्ति के सामने ऐसी कौन सी परिस्थितियां…

हास्य व्यंग्य : सुरंगों का खतरा

Posted on September 5, 2023

व्यंग्यकार विनय प्रताप जी मेरी पत्नी ने मुझे सवेरे-सवेरे एक बहुत बड़ी बहस में उलझा दिया। मैं बैठा हुआ टी.वी. पर समाचार देख रहा था तभी उन्होंने सुरंगों के सम्बन्ध में अपनी…

कविता : बदल रहा हरेक समीकरण है

Posted on September 5, 2023

वरिष्ठ कवि श्री परमहंस तिवारी ‘परम’, वाराणसी बदल रहा हरेक समीकरण है गाँव का हो रहा शहरीकरण है। कुएँ का मुँह हुआ अब तंग है रहट की बाल्टी पर जंग है छेद…

कविता : सत्य -असत्य के बीच

Posted on September 5, 2023

डॉ अनूपा कुमारी सत्य – असत्य के बीच उधेड़-बुन में उलझा मानव कभी दिल तो कभी दिमाग से बहुत कुछ सोचता है सोचता ही रहता है किन्तु परिणाम तक नहीं पहुंच पाता…

कविता: मैं ऐसी ही हूं

Posted on September 5, 2023

प्रतिमा सिंह, मऊ हां मैं बोल जाती हूं ज्यादा कभी-कभी, क्योंकि मैं खुद को संभालना नहीं जानती। हां मैं कर जाती हूं नादानियां कभी-कभी क्योंकि मैं समझना नहीं जानती। हां मैं बन…

Posts pagination

Previous 1 … 12 13 14 … 19 Next

Recent Posts

  • कविता – करते रुदन विलाप हैं पाठन बिन सब छंद
  • वीथिका ई पत्रिका का जनवरी, 2026 अंक ” शिव-शक्ति”
  • वीथिका ई पत्रिका का जून-जुलाई, 2025 संयुक्तांक “बिहू : ओ मुर अपुनर देश”
  • वीथिका ई पत्रिका का मार्च-अप्रैल, 2025 संयुक्तांक प्रेम विशेषांक ” मन लेहु पै देहु छटांक नहीं
  • लोक की चिति ही राष्ट्र की आत्मा है : प्रो. शर्वेश पाण्डेय
©2026 वीथिका | Design: Newspaperly WordPress Theme