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कविता – करते रुदन विलाप हैं पाठन बिन सब छंद

Posted on January 16, 2026

सतीश चन्द्र श्रीवास्तव

सीतापुर, उ.प्र.

करते रुदन विलाप हैं पाठन बिन सब छंद।

लाइक और कमेंट बिन छंद जेल में बंद।।

बड़े एक से एक हैं साहित्यिक ग्रुप आज।

किंतु एडमिन भी नहीं रखते ग्रुप की लाज।।

सरक रहीं स्क्रीन पर अंगुलियों से पोस्ट।

मेंबर सारे धुत्त हैं ज्यों कब्रों में घोस्ट।।

छैल छबीली ले गई लाइक लाख बटोर।

मगर छबीले लाल की रचना हो गई बोर।।

कुछ ग्रुप चादर तान कर,गये नशे में सो।

पोस्ट आ रही,जा रही, फिर जाती है खो।।

कवि नें हृदय निकाल कर,भर रचना में प्रान।

फेसबुक्क पर पोस्ट की,हो गयी अंतर्ध्यान।।

लाइक और कमेंट ही,है कविकुल की फीस।

वह भी ना दे पा रहे, सुहृद निपोरें खीस।।

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